खाड़ी की जंग से पस्त अर्थव्यवस्था के बहाने कुछ विचार


चार महीने पहले तक हम अर्थव्यवस्था की मजबूती की खुशफहमी में थे कि होरमुज़ की जंग ने सपना तोड़ दिया। डॉलर के मुकाबले रुपया गिर रहा था पर उसे हम अपने निर्यात के लिये अच्छा मान रहे थे। लेकिन जंग के कारण जब कच्चा तेल सौ डॉलर पार हुआ तो अर्थशास्त्रियों की चोटी खड़ी होContinue reading “खाड़ी की जंग से पस्त अर्थव्यवस्था के बहाने कुछ विचार”

नर्मदा दंड परिक्रमा : अध्याय 2


केवड़ारी से केदारपुर  अप्रेल अंत — मई 2026 29 अप्रेल 2026 महीना भर हो गया है दंड भरते प्रेमसागर को। नक्शे पर दूरी जोड़ी जाये तो कच्ची-पक्की सड़कों, पगडंडियों, गाँवों-जंगलों से गुजरते पैंतालीस किलोमीटर नाप लिये हैं — दंड भरते। पच्चीस हजार से ज्यादा दंड। उनकी मानी जाये तो वे इससे दुगना नाप चुके हैं,Continue reading “नर्मदा दंड परिक्रमा : अध्याय 2”

अगियाबीर की कंकही 


मेरे सामने कंघी के साथ कंकही पड़ी है। कंकही वह साधारण उपकरण है जो बालों से जुएं निकालने के काम आता है। मानव इतिहास में शायद ही कोई समाज रहा हो जहां जुएं न रही हों। जहां जुएं रहीं, वहां उन्हें निकालने के उपाय भी विकसित हुए। तेल लगे बालों को फैलाना और कंकही सेContinue reading “अगियाबीर की कंकही “

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