सवेरे की चाय पर टुन्नू (शैलेंद्र) पण्डित


टुन्नू पण्डित – शैलेंद्र दुबे – मेरे साले साहब हैं। उन्हीं के चक्कर में पड़ कर हम गांव में अपना घरबार शिफ्टिया लिये रिटायरमेण्ट के बाद। कभी कभी सवेरे की चाय पर आ जाते हैं। वह बहुत कम होता है – ज्यादातर उनके चेला लोग सवेरे से उन्हें घेर लेते हैं। आजकल जिल्ला भाजपा केContinue reading “सवेरे की चाय पर टुन्नू (शैलेंद्र) पण्डित”

मटर और महुआ उबाल कर खाते रहे हैं अतीत में – सत्ती उवाच


पहले के खाने के बारे में बताती है। दो जून खाना तो बनता ही नहीं था। मटर की दाल के साथ महुआ उबालते थे। वही खाते थे। मौसम में 2-2 बोरा महुआ बीन कर इकठ्ठा किया जाता था। उसी से काम चलता था।

सुंदर नाऊ की पतोहू #गांवपरधानी उम्मीदवार


साल भर बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। यद्यपि प्रधानी का चुनाव पार्टी आधार पर नहीं हो रहा पर हर एक पार्टी अपने अपने पक्ष के प्रधान जितवाने का जोर लगायेगी। और ऐसा नहीं कर रही तो जल्दी ही करेगी भी। इस लिये सुंदर नाऊ की सिधाई की अपनी सशक्त ब्राण्ड वैल्यू है!

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free