शिवकुटी, नारायणी आश्रम और राणा का इतिहास खण्ड


मैने कभी नहीं सोचा कि मैं इतिहास पर लिखूंगा। स्कूल के समय के बाद इतिहास बतौर एक डिसिप्लिन कभी देखा-पढ़ा नहीं। पर यहां इलाहाबाद के जिस शिवकुटी क्षेत्र में रहता हूं – गंगा के तट पर कोई चार-पांच सौ एकड़ का इलाका; वहां मुझे लगता है कि बहुत इतिहास बिखरा पड़ा है। बहुत कुछ कोContinue reading “शिवकुटी, नारायणी आश्रम और राणा का इतिहास खण्ड”

कल्लू का बिजूका


अरविन्द वहीं था, गंगा किनारे अपने कोन्हड़ा-नेनुआ के खेत पर। अब वह मुझे पहचानने लगा है; सो दूर से ही उसने नमस्ते करी। मैं उसकी ओर मुड़ा तो बोला – जरा बच के आइयेगा। नीचे नेनुआ के पौधे हैं। पिछले दिनों की सर्दी से पनपे नहीं। वास्तव में नीचे सम दूरी पर जरा-जरा से पौधेContinue reading “कल्लू का बिजूका”

बाल दिवस


पलक – शरारती लड़की। मेरे गेट की डोरबेल बजा कर भाग जाती है। पकड़ने पर इतनी जोर से चिल्लाती है कि मानो उसका गला काट दिया जा रहा हो! तीन साल पहले इसपर पोस्ट लिखी थी – गुण्डी। अब तो यह बड़ी हो गयी है। स्कूल जाती है। यह फोटो सवेरे की है जब स्कूलContinue reading “बाल दिवस”

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