दो नदियाँ और विनोद-प्वॉइण्ट


घाट की सीढ़ियों से आगे चलो तो दो नदियां दिखती हैं। पहले है रेत की नदी। चमकती सफेद गंगा की रेत। महीन। पैर में चुभती नहीं, पैर धंसता है उसमें। सड़क-पगडंडी में चलने में जो रफ्तार होती है, उसकी आधी से कम हो जाती है इस रेत की नदी में। रफ्तार आधी और मेहनत डब्बल।Continue reading “दो नदियाँ और विनोद-प्वॉइण्ट”

बाल पण्डितों का श्रम


शिवकुटी में गंगा तीर पर सिसोदिया की एक पुरानी कोठी है। उसमें चलता है एक संस्कृत विद्यालय। छोटे-बड़े सब तरह के बालक सिर घुटा कर लम्बी और मोटी शिखा रखे दीखते हैं वहां। यहां के सेमी-अर्बन/कस्बाई माहौल से कुछ अलग विशिष्टता लिये। उनके विद्यालय से लगभग 100 मीटर दूर हनूमान जी के मन्दिर के पासContinue reading “बाल पण्डितों का श्रम”

गंगा के पानी की पम्पिंग कर सिंचाई


गंगाजी की रेती के कछार में लोग नेनुआ, लौकी, कोंहड़ा, तरबूज, खीरा और ककड़ी की खेती करते हैं। यह काम दीपावली के बाद शुरू होता है। इस समय यह गतिविधि अपने चरम पर है। आप इस विषय में कई पहले की पोस्टें गंगा वर्गीकरण पर खंगाल सकते हैं। मैने पिछली पोस्ट में बताया था  किContinue reading “गंगा के पानी की पम्पिंग कर सिंचाई”

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