<<< मकर संक्रांति – गंगे तव स्मरणात् मुक्ति: >>> रात में जब भी नींद खुली, प्रयाग की ओर जाती रेलगाड़ियां बोझिल और उल्टी दिशा वाली फर्राटे से गुजरती सुनाई दीं। प्रयाग जाने वाली सभी सामान्य और मेला स्पेशल ट्रेने हर स्टेशन पर रुक रही होंगी – इस कटका स्टेशन पर भी। वापसी में खाली गाड़ियांContinue reading “मकर संक्रांति – गंगे तव स्मरणात् मुक्ति:”
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प्रेमसागर की संगम यात्रा
<<< प्रेमसागर की संगम यात्रा >>> 8 जनवरी 25 प्रेमसागर ने फोन किया सवेरे। वे साइकिल से अपने गांव से चल दिये हैं। गांव जीरादेई, सिवान के पास है। वहां से बलिया, गाज़ीपुर, बनारस होते संगम जायेंगे कल्पवास के लिये। द्वादश ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ पदयात्रा पैदल चलते रोज पच्चीस तीस किलोमीटर नापते थे प्रेमसागर। साइकिलContinue reading “प्रेमसागर की संगम यात्रा”
पुराने कपड़ों से रजाई बनाने वाले
<<< पुराने कपड़ों से रजाई बनाने वाले >>> घर के बगल की महुआरी में आये हैं पुराने कपड़े से रजाई-गद्दे बनाने वाले। तीन दिन से डेरा किया है। मेरी पत्नीजी की सहायिका अरुणा अपने इक्कीस किलो पुराने कपड़ों से तीन रजाइयां बनवा लाई है। उसने हमें बताया तो हम (पत्नीजी और मैं) देखने गये। महुआरीContinue reading “पुराने कपड़ों से रजाई बनाने वाले”
