भाग दो – कैलीफोर्निया में श्री विश्वनाथ


यह श्री गोपालकृष्ण विश्वनाथ की अतिथि पोस्ट है: एक और बात मैंने नोट की और वह है ये अमरीकी लोग अपनी प्राइवेसी (privacy) पर कुछ ज्यादा ही जोर देते हैं।  अमरीकी नागरिक खुलकर  बातें नहीं करते थे हम लोगों से। हम जैसे कम्यूनिकेटिव (communicative) नहीं होते। शायद मेरा यह अनुमान गलत है और सिर्फ़ मेरेContinue reading “भाग दो – कैलीफोर्निया में श्री विश्वनाथ”

हरतालिका तीज


आज सवेरे मन्दिर के गलियारे में शंकर-पार्वती की कच्ची मिट्टी की प्रतिमायें और उनके श्रृंगार का सस्तौआ सामान ले कर फुटपाथिया बैठा था। अच्छा लगा कि प्रतिमायें कच्ची मिट्टी की थीं – बिना रंग रोगन के। विसर्जन में गंगाजल को और प्रदूषित नहीं करेंगी। गंगाजी में लोग लुगाई नहा रहे थे। पानी काफी है वहां।Continue reading “हरतालिका तीज”

टल्लू की मछरियाँ


टल्लू का भाई भोला बिजनिस करता है और बचे समय में दारू पीता है। टल्लू दारू पीता है और बचे समय में अब तक माल ढोने की ट्राली चलाता था। दारू की किल्लत भई तो नौ सौ रुपये में ट्राली बेच दी। अब वे नौ सौ भी खतम हो चुके हैं। उस दिन भरत लालContinue reading “टल्लू की मछरियाँ”

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