इण्डियन एक्स्प्रेस हाजिर हो!!!


अरुण शौरी के जमाने से इण्डियन एक्स्प्रेस मेरा पसन्दीदा अखबार है. मैं 2003-04 में गोरखपुर में था. इण्डियन एक्स्प्रेस एक दिन देर से मिलता था, फिर भी मैने उसे जारी रखा. पर जब एक दिन बाद भी उसकी सप्लाई अटकने लग गयी तो जा कर अपनी लॉयल्टी बदली. अब भी मैं नेट पर इण्डियन एक्स्प्रेसContinue reading “इण्डियन एक्स्प्रेस हाजिर हो!!!”

मीक, लल्लू, चिरकुट और क्या?


यह हेडिंग अज़दक छाप हो गया है. उनके लेखों के शीर्षक ऐसे ही होते हैं, जिससे न सिर समझ में आये न पैर. फिर झख मार कर आप समझने के लिये उनके कंटिये * में फंस जायें. खैर, अजदक को लिंक करने का मन नहीं है. यह ठोस मेरा लेख है. एक मीक वह है,Continue reading “मीक, लल्लू, चिरकुट और क्या?”

इधर के और उधर के लोग


इधर के बारे में मुझे दशकों से मालूम है. इधर माने रेलवे – मेरा कार्य क्षेत्र. रेलवे को मिनी भारत कहते हैं. उस मे बड़े मजे से काम चल रहा था/है. यह महज एक संयोग था कि हिन्दी ब्लॉगरी के लोगों का पता चला. अब चार महीने से उधर यानि हिन्दी ब्लॉगरी के विषय मेंContinue reading “इधर के और उधर के लोग”

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