गांवदेहात डायरी सालों बाद कटका के प्लेटफार्म नम्बर 2 पर गया। वहीं मिला हरिहर। अंधा है वह। हाथ में एक लाठी, बगल में एक झोला—जिसमें बिस्कुट के पैकेट। उन्हीं को लेकर वह ट्रेनों के कॉरिडोर में चलता और बेचता है। हरिहर प्लेटफार्म पर बैठने लगा तो किसी ने आगाह किया—“ट्रेन आवे वाली बा। आगे बैठबेContinue reading “हरिहर से बातचीत”
Category Archives: Vikrampur
खाड़ी जंग से बदलता गांवदेहात
गांवदेहात डायरी साइकिल लेकर निकलता हूं तो हर जगह कुछ बदलाव नजर आता है। विक्रमपुर की हाइवे से संधि पर दोनों ओर दो गुमटियां हैं—जग्गी की आलू टिक्की और राजेश की समोसा बेचने वाली। दस दिन से दोनों बंद हैं। दोनों गैस पर चलाते थे अपनी दुकान। अब मेरे लिये यह समाजशास्त्रीय अध्ययन होगा—देखना किContinue reading “खाड़ी जंग से बदलता गांवदेहात”
सुधा जी की शादी और पालकी का जमाना
सुधा शुक्ल हमारे घर मिलने आईं। पंड़ाने (पांडेय लोगों के घरों का समूह) के दीपू की बुआ हैं वे। मेरी पत्नीजी की हमउम्र, जन्म 1959–60 के आसपास। करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर आई थीं। वे और मेरी पत्नीजी बचपन की सखियाँ हैं। उस समय सखियाँ अग्नि को साक्षी मानकर बनती थीं—जैसे राम और सुग्रीव। सुधाContinue reading “सुधा जी की शादी और पालकी का जमाना”
