24 सितंबर, पुष्य नक्षत्र, स्वर्ण प्राशन



हम यहाँ सूर्या ट्रॉमा सेंटर और अस्पताल में हैं, पिताजी के यहां भर्ती होने के कारण.

अंदर ही बंद रहता हूं तो अंदाज नहीं लगता कि मौसम कितना खराब है. गंगाजी की बाढ़ की खबरें मिलती रहती हैं. कल तक तो बाढ़ पर ही थीं. कल ही क्वार मास में पुष्य नक्षत्र का संयोग था. स्वर्ण प्राशन का दिन.

पुष्य नक्षत्र के दिन ही प्राचीन काल में राज वैद राज्य के बच्चों को स्वर्ण भस्म (घी में मिला कर) चटाया करते थे. यह कृत्य 24 बार किया जाता था 16 वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों के साथ. स्वर्ण प्राशन का लाभ होता था बच्चे की रोग प्रतिरोध क्षमता और मेधा के विकास में.

यह पुनः प्रारंभ किया है सूर्या चाइल्ड हॉस्पिटल के डाक्टर दंपति शर्मिला और संतोष तिवारी ने. और थोड़े ही समय में 1700 के आसपास बच्चों का इसके लिए पंजीकरण हो गया है.

Continue reading “24 सितंबर, पुष्य नक्षत्र, स्वर्ण प्राशन”

बुआ का इनारा का झोलाछाप गायनिक डाक्टर और बिगड़ा हुआ केस



डाक्टर साहब बताते हैं कि कि पास में कोई क्वैक (नीम हकीम) डाक्टर है जो प्रसव कराता (कराती) है. उसके दो तीन खराब किए केस यहां अस्पताल (सूर्या ट्रॉमा सेंटर) में आए हैं.

मेरे पिताजी के बगल वाले बिस्तर पर इमर्जेंसी वार्ड में है वह महिला. पतली दुबली. साँवली – शायद उसकी श्यामलता में तांबे का रंग मिला है. चेहरे की बनावट आकर्षक है. आंखे बहुत कातर. बछिया की आँखों जैसी. उसके बिस्तर के पास एक अधेड़ महिला खड़ी है. मैं अपनी पत्नी जी से कहता हूँ कि उस महिला से पूछें की कैसा केस है.

महिला बताती है कि वह मरीज की मां है. मरीज की डिलिवरी के लिए ससुराल वाले बुआ के इनारा (पास का कोई स्थान) पर एक डाक्टर के यहां ले गए थे. बच्चा तो हो गया पर दस मिनट में ही कोई नस दबने से उनकी बेटी दर्द से छटपटाने लगी. जब केस बिगड़ गया तो वह अपने घर बाबू सराय से आ कर यहां सूर्या ट्रॉमा सेंटर में ले कर आई है.

Continue reading “बुआ का इनारा का झोलाछाप गायनिक डाक्टर और बिगड़ा हुआ केस”

सूर्या ट्रॉमा सेंटर पर सोच – एक फुटकर पोस्ट



मुझे अभी भी समझ नहीं आता कि सूर्य मणि जी ने इतनी उत्कृष्ट अस्पताल सुविधायें सूर्या ट्रॉमा सेंटर और अस्पताल, औराई जैसे ग्रामीण स्थान में क्यों प्लान की हैं. कमरों/वार्ड में सेरा और जाग्वार की फिटिंग्स हैं जब कि अधिकांश उपभोक्ता जनता अपने गांव और कस्बे के घरों में पाइप्ड पानी सप्लाई भी नहीं पाती.

अस्पताल के कमरे में W/C की सेरा और जगुआर की फिटिंग. इनसेट में श्री सूर्य मणि तिवारी

शायद गांव देहात के भविष्य की सोच उनके मन में है? अगर इस पूर्वांचल का विकास 7-8% की वार्षिक दर से हुआ तो बहुत संभव है हाईवे के साथ सटी पट्टी वैसे ही क्वॉसी-अर्बन हो जाए जैसे बड़ौदा – अहमदाबाद की पट्टी है.

पर फिलहाल तो इन सुविधाओं की वैसी दशा होने की आशंका है जैसी महामना और वन्दे भारत एक्सप्रेस की सुविधाओं की हुई थी. मरीजों और उनके तीमारदारी में आने वाले संबंधियों को अपना समान्य से बेहतर स्तर तो दिखाना ही होगा.

Continue reading “सूर्या ट्रॉमा सेंटर पर सोच – एक फुटकर पोस्ट”
Design a site like this with WordPress.com
Get started