सूर्यमणि तिवारी – अकेलेपन पर विचार


फोन पर ही सूर्यमणि जी ने कहा था कि बहुत अकेलापन महसूस होता है। यह भी मुझे समझ नहीं आता था। अरबपति व्यक्ति, जो अपने एम्पायर के शीर्ष पर हो, जिसे कर्मचारी, व्यवसाय, समाज और कुटुम्ब के लोग घेरे रहते हों, वह अकेलापन कैसे महसूस कर सकता है?

धनी कैसे व्यवहार करते हैं


आने वाले समय में जहां गंगा किनारे मड़ई में रहने वाले किसान और मछेरे की जिन्दगी के बारे में देखना, लिखना चाहूंगा, वैसे ही तिवारी जी और पाण्डेय जी जैसे लोगों को देखने, समझने और उनपर लिखने का अवसर भी तलाशता रहूंगा।

सूर्या ट्रॉमा सेंटर पर सोच – एक फुटकर पोस्ट


उसने बताया कि सुबह शाम कर्मचारियों के साथ वह बातचीत करता है. समझाता है कि कहां कौन सा disinfectant प्रयोग में लाना है. कहाँ सूखा और कहां गीला पोछा लगाना है. कर्मचारियों के साथ डांट और पुचकार दोनों का इस्तेमाल करता है. वह एक प्रकार से ऑन जॉब ट्रेनिंग दे रहा है कर्मचारियों को. दुर्गेश का जोश मुझे आशा वादी बनाता है.

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