कोविड19 प्रसार, मसाले, गिलोय और इम्युनोलॉजी

भारत के लोगों में मसालों का प्रचुर प्रयोग शायद उन्हें इस प्रकार की रोग प्रतिरोधक क्षमता देता है कि कोरोना वायरस के ग्रसित लोग; बढ़ी उम्र और को-मॉर्बिडिटी होने के बावजूद ठीक ज्यादा हुये और उनको वेण्टीलेटर की जरूरत पश्चिमी देशों की अपेक्षा कहीं कम पड़ी।


कोविड19 का प्रसार पिछले दो दिनों में तेजी से हुआ है। तबलीगी जमात की कृपा (?) से मामले तेजी से बढ़े और पूरे देश को इन लोगों ने धांग दिया। टेस्टिंग की सुविधायें भारत में वैसे भी ज्यादा नहींं थीं। उनपर दबाव और बढ़ गया। शायद एक तिहाई टेस्टिंग तबलीगी जड़ता को समर्पित हो गयी। पुलीस अपना जरूरी काम छोड़ मस्जिदों को खंगालने लगी। यह तबका सहयोग ही नहीं कर रहा था। इंदौर में तो इन शूरवीरों ने नर्सों-डाक्टरों-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पत्थर मारे और दौड़ाया। अन्य स्थानों पर इन महानुभावों द्वारा पुलीस पर थूकने, नर्सों से अश्लील इशारे करने और डाक्टरों से अभद्र बर्ताव करने के केस भी सामने आये हैं। लॉकडाउन को पर्याप्त क्षति पंहुचाई है इस जमात ने।

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24 सितंबर, पुष्य नक्षत्र, स्वर्ण प्राशन

मेरी पोती पद्मजा (चिन्ना) पांड़े ने भी कल पहली बार स्वर्ण प्राशन किया. उसके अनुसार डाक्टर अंकल बहुत अच्छे हैं, कोई सूई नहीं लगाई .



हम यहाँ सूर्या ट्रॉमा सेंटर और अस्पताल में हैं, पिताजी के यहां भर्ती होने के कारण.

अंदर ही बंद रहता हूं तो अंदाज नहीं लगता कि मौसम कितना खराब है. गंगाजी की बाढ़ की खबरें मिलती रहती हैं. कल तक तो बाढ़ पर ही थीं. कल ही क्वार मास में पुष्य नक्षत्र का संयोग था. स्वर्ण प्राशन का दिन.

पुष्य नक्षत्र के दिन ही प्राचीन काल में राज वैद राज्य के बच्चों को स्वर्ण भस्म (घी में मिला कर) चटाया करते थे. यह कृत्य 24 बार किया जाता था 16 वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों के साथ. स्वर्ण प्राशन का लाभ होता था बच्चे की रोग प्रतिरोध क्षमता और मेधा के विकास में.

यह पुनः प्रारंभ किया है सूर्या चाइल्ड हॉस्पिटल के डाक्टर दंपति शर्मिला और संतोष तिवारी ने. और थोड़े ही समय में 1700 के आसपास बच्चों का इसके लिए पंजीकरण हो गया है.

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