ट्विटर पर नष्ट किये समय का विवरण



हिन्दी ब्लॉगिंग शुरू की थी तो स्टैटकाउण्टर से पाला पड़ा था। पोस्टों पर आई टिप्पणियों का निरखन भी होता था। वह काफी समय चला। अब उसका क्रेज़ मिट गया है। पल पल पर उसके आंकड़े देखना जरूरी नहीं लगता। पर शायद किसी मुद्दे के बदलते आंकड़े रुचि जगाते हैं।

ट्विटर और फेसबुक के अकाउण्ट मैने काफी समय से बना रखे हैं। आप वे  http://twitter.com/gyandutt और https://www.facebook.com/gyandutt पर देख सकते हैं। इन पर बनने वाले आंकड़े – फॉलोअर या मित्र संख्या से बहुत मोह नहीं उपजता। आप जानते हैं कि लगभग 150 से अधिक लोगों से आदान-प्रदान वाली मैत्री नहीं निभा सकते। उससे अधिक की मित्र संख्या औपचारिकता है। अत: इन अकाउण्ट्स के साथ बहुत समय व्यतीत नहीं हुआ।

कुछ समय पहले (लगभग 15 दिन हुये) क्लाउट.कॉम का पता चला। यह साइट आपके ट्विटर और फेसबुक अकाउण्ट का विश्लेषण कर आंकड़े बनाती है – नित्य अपडेट होने वाले आंकड़े। इन आंकड़ों में उपयोक्ता की प्रवृत्ति, नेट पर उसके प्रभाव में विस्तार, उसके कहे का प्रसारण का स्तर और सम्भावनाओं का आकलन होता है। इन आंकड़ों को काफी सीमा तक उपयोगी माना जा सकता है।

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संकर दुकान कब खोलिहैं!



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सामू ने बाल काटने में बिगाड़ दिया है। साला बकलोल बना दिया है!

शंकर पासवान का हेयर कटिंग सैलून है मेरे घर के पास नुक्कड़ पर। लम्बे अर्से से दुकान बन्द थी। शंकर का ब्याह था। व्याह के बाद हनीमून। परिणाम यह हुआ कि मेरे बाल झपोली बन गये। एक आध बार तो शैम्पू पिलाना पड़ा उन्हे। अन्यथा लट पड़ने के चांसेज़ थे।

अंतत: आज पता चला कि शंकर ने दुकान खोल ली है फिर से। अपने लिये सीट आरक्षित करा कर वहां पंहुचा तो देखा कि शंकर अपने सांवले रंग के बावजूद स्मार्ट लग रहा था। शादी के बाद लोग स्मार्ट हो जाते हैं क्या? अपनी याद नहीं, इस लिये पूछ रहा हूं।

सैलून में एक लड़का-कम-जवान विभिन्न मुद्राओं में शीशे में अपना चेहरा देख रहा था। बोलता जा रहा था –Continue reading “संकर दुकान कब खोलिहैं!”

हिन्दी हितैषणा वाया जर्सी गाय



हिन्दी ‘सेवा’ की बात ब्लॉगजगत में लोग करें तो आप भुनभुना सकते हैं। पर आपके सपोर्ट में कोई आता नहीं। पता नहीं, इतने सारे लोग हिन्दी की सेवा करना चाहते हैं। हिन्दी ब्लॉगजगत में सभी स्वार्थी/निस्वार्थी हिन्दी को चमकाने में रत हैं और हिन्दी है कि चमक ही नहीं रही। निश्चय ही हिन्दी सेवा पाखण्ड है। यह पाखण्ड चलता चला जा रहा है।

पर जब अज्ञेय जैसे महापण्डित ‘हिन्दी हितैषी’ की बात करते हैं तो मामला रोचक हो जाता है। आप उनका लिखा पढ़ें –Continue reading “हिन्दी हितैषणा वाया जर्सी गाय”

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