बांस के कारीगरों के समीप


करीब एक दर्जन घर हैं धईकारों के। वे सब बांस के सामान बुनते हैं। रीता पाण्डेय ने एक महिला, बदामा, से बातचीत की। एक उसौनी खरीदी।

दउरी बनाने वालों का बाजार


संक्रांति के अवसर पर हम लाई, चिवड़ा, गुड़ की पट्टी, तिलकुट, रेवड़ी, गुड़ का लेड़ुआ और गजक जैसी चीजें खरीदने के लिये महराजगंज बाजार गये थे। वहां गिर्दबड़गांव की धईकार बस्ती के संतोष दिखे। एक साइकिल पर बांस की दऊरी लटकाये थे।

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