अरे वह क्रियेटिव – फन ही नहीं, देने की प्रसन्नता की आदत विकसित करना भी था।

आनंद को केंद्र में रख कर अपनी आदतें ढालने की एक सयास कोशिश की जा रही है। विचार यह है कि हम उसे पैसा खर्च कर, सामान खरीद कर, मार्केटिंग कर या इधर उधर की बतकही/परनिंदा कर नहीं, विशुद्ध प्रसन्नता की आदतें विकसित करने से करेंगे।


जीवन की मोनोटोनी दूर करने का दौर है। मेरी पत्नी जी सवेरे एक स्पीकर पर म्यूजिक लगा कर घर के ड्राइंग कक्ष में ही घूमने का काम कर रही हैं। करीब पौना घण्टा का हल्का व्यायाम। सर्दियों में घर के बाहर निकलना नहीं हो पा रहा साइकिल ले कर। मेरी पत्नीजी भी मॉर्निंग वॉक पर नहीं निकल रहीं। इस लिये यही किया जा रहा है। वे संगीत सुनते हुये घर में घूमती हैं और मैं कान पर हेड-फोन लगा कर स्टेशनरी साइकिल चलाता हूं। काम भर का व्यायाम हो ही जाता है।

पॉडकास्ट सुनते स्टेशनरी साइकिल चलाना। इनसेट में सस्ती वाली साइकिल।

उसके बाद घर में प्लास्टिक के जितने खाली, बिना इस्तेमाल के पड़े डिब्बे हैं; उन्हें कबाड़ी को देने की बजाय, काट कर पेण्ट कर आकर्षक छोटे गमले बना रही हैं। दिन में जब समय मिलता है, बाहर पोर्टिको में बैठ कर गमले रंगने का काम कर रही हैं।

मेरी पत्नीजी का पेण्ट करने का सामान। घर में छोटे बड़े डिब्बे काट काट कर उनके गमले बन रहे हैं।

बनारस में फुटपाथ वाली दुकान से सीमेण्ट के गमले खरीदे थे, उनपर भी पेण्ट हुआ है।

मचिया बनाना – उसमें लगे सामान को जुटाना, पेण्ट करना/कराना और राजबली, रामसेवक, अशोक से तालमेल बिठाना – इस सब में अपना समय लगाया है।

Rita Pandey painting machiya
मचिया पेण्ट करते हुये रीता पाण्डेय

तीन साल से ‘मनी’ नामक बिजनेस गेम खरीदा है। वह यह पढ़ कर खरीदा था कि नियमित खेलने से डिमेंशिया/पार्किंसन रोग से बचाव होता है। पर आज तक उसका प्रयोग नहीं किया। अब सोचा जा रहा है कि उसे नियमित खेला जाये।

रामचरित मानस पढ़ने का नियमित कार्य प्रारम्भ किया है हम दोनो ने। जुगलबंदी में एक चौपाई/दोहा वे पढ़ती हैं; एक मैं। बीच में तुलसी का लिखा कोई गूढ़ प्रसंग आता है तो हम लोग बीच में रुक कर उसका अर्थ भी देखते हैं। पोद्दार जी का मानस अनुवाद भी अपने पास रखते हैं। ज्यादा नहीं, शाम के समय बीस दोहे का पठन/वाचन करते हैं। उसके बाद दो दो किशमिश के दानों का प्रसाद भी लेते हैं। मन में है कि इस कार्य के लिये एक डिब्बे में लाचीदाना और कच्ची मूंगफली दाने रखेंगे – प्रसाद के लिये।

ब्लॉगिंग और/या विविध विषयक वीडियो और पॉडकास्ट – यह सब लिखने, पढ़ने, देखने आदि को अपनी आदत में लाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

आनंद को केंद्र में रख कर अपनी आदतें ढालने की एक सयास कोशिश की जा रही है। विचार यह है कि हम उसे पैसा खर्च कर, सामान खरीद कर, मार्केटिंग कर या इधर उधर की बतकही/परनिंदा कर नहीं, विशुद्ध प्रसन्नतादतें (प्रसन्नता-आदतें) विकसित करने से करेंगे।

Kottu Vellaku Deepam
रघुनाथ जी का उपहार – कोट्टु वेल्लकू दीपम

रघुनाथ जी के लिये मचिया बनाने-बनवाने का उद्यम उसी प्रकार की एक प्रसन्नतादत है! इसमें दूसरी प्रसन्नतादत अपने में ‘देने का भाव’ लाना है। हमने उसकी भी गहन अनुभूति की! हमने रघुनाथ दम्पति से मचिया देने के बदले कुछ पाने की बात सोची ही नहीं थी। पर हमें कई चीजें बहुमूल्य मिलीं –

  1. श्रीमती गीतांजलि और श्री रघुनाथ जी से आत्मीय सम्पर्क
  2. रघुनाथ जी द्वारा मेरी बिटिया और दामाद को उनके घर आने का निमंत्रण
  3. रघुनाथ दम्पति द्वारा भेजा जाने वाला रिटर्न-गिफ्ट। उन्होने जो भेजने की सोची, वह इतना सुरुचिपूर्ण है कि हम उसे किसी भी दशा में मना नहीं कर सकते।
  4. यह समझ में आना कि गांव में रहते हुये भी अनेकानेक लोगों से – और बहुत उत्कृष्ट लोग हैं दुनियाँ में – जुड़ाव अपने में सघन प्रसन्नता का भाव विकसित करते हुये भी सम्भव है। उसमें किसी भी प्रकार की कोई उकताहट या ड्रजरी नहीं है!

यह देने का भाव या प्रसन्नता की आदत हमें कायम रखनी है। हमने तय किया है कि आगे कुछ महीने तक हम मचिया बनाने/देने का प्रयास जारी रखेंगे। ज्यादा नहीं, हर महीने एक मचिया देने की आदत। जिससे हमारे ऊपर आर्थिक बोझ भी न पड़े और प्रसन्नता-आदत भी संतृप्त होती रहे।

इस प्रसन्नतादतों के विकास की प्रक्रिया में जो कुछ होगा, उसे ब्लॉग पर साझा करने का प्रयास भविष्य में होता रहेगा! 🙂

रीता पांड़े के पेंट किए गमले

डेल्हीवरी के नीरज मिश्र जी मचिया का पैकेट ले गये आज!

मचिया के पैकेट का बोझ जो हमारे सिर पर था; वह नीरज की तत्पर सेवा से हल्का हो गया। नीरज जी ने बताया कि चार दिन में रघुनाथ जी को नोयडा में वह डिलिवर हो जाने की सम्भावना है।


1 फरवरी 2021 –

नीरज कुमार मिश्र डेल्हीवरी नामक कुरियर कम्पनी से एक दशक से जुड़े हैं। उनपर मैंने पहले भी एक पोस्ट लिखी थी अप्रेल 2020 में, कि कैसे कोरोना संक्रमण के पीक समय में भी वे कार्यरत थे और अपनी सेवायें भदोही के ग्रामीण अंचल में भी प्रदान कर रहे थे। उस समय बाकी सारी कुरियर कम्पनियां बिल में समा गयी थीं। इस इलाके में केवल डेल्हीवरी ही (नीरज कुमार मिश्र की कार्यकुशलता से) अपनी सेवायें प्रदान कर रही थी।

Machiya – मचिया

अब रघुनाथ जी के लिये मचिया भेजने की जरूरत सामने आयी तो मुझे नीरज जी का स्मरण हो आया। हम लोगों ने घर में उपलब्ध कार्डबोर्ड और थर्मोकोल का प्रयोग करते हुये दोनो मचिया एक साथ रख कर एक पैकेट तो बना दिया पर उसे एक बाहरी आवरण देने और उसपर नाम-पता आदि लिखने की बात बाकी रह गयी थी। सोचा कि जूट का एक आवरण दे कर उसे सुतली से सिला जाये। पर वह विकल्प जम नहीं रहा था। जूट का पैकेट के आकार का कोई बोरा भी नहीं था।

नीरज जी ने हमारी समस्या हल कर दी। उन्होने कहा कि आप अपना पैकेट तैयार रखें, वे सवेरे सात बजे अपनी ड्यूटी पर जाते समय उसे कलेक्ट कर लेंगे और डेल्हीवरी के दफ्तर में उस पैकेट को डेल्हीवरी के ही बोरे में पैक कर, उस पर पाने वाले का पता आदि लगा कर, उसकी डिस्पैच की औपचारिकतायें पूरी कर देंगे। औपचारिकतायें पूरी करते समय उसका जो भी कुरियर चार्ज लगेगा, वह मुझे वे फोन पर बता देंगे और वह मुझे फोन-पे एप्प पर उन्हे देना होगा। इस प्रकार गांव में अपने घर से ही मुझे पैकेट भेजने की सुविधा मिल जायेगी। इस तरह की सुविधा की कल्पना भी मैं नहींं कर सकता था।

मैं नीरज जी की एक दिन प्रतीक्षा करता रहा। उनसे फोन पर पूछा तो बताया कि मोटर साइकिल पर एक अन्य व्यक्ति के साथ हो जाने के कारण वे पैकेट लेने नहीं आ सके। वे दूसरे दिन सवेरे सात बजे आये। मैं उनको घर के बाहर गेट पर ही मिल गया।

नीरज दूसरे दिन सवेरे सात बजे आये। मैं उनको घर के बाहर गेट पर ही मिल गया।

उन्होने मेरा और मेरी पत्नीजी का चरण स्पर्श कर अभिवादन किया; पैकेट उठाया और दो मिनट में ले कर रवाना भी हो गये। सवेरे सवेरे चाय की पूछने पर कहा – बाबूजी, आज दफ्तर पंहुचने की जल्दी है। फिर कभी आऊंगा।

नीरज पैकेट लेते हुये।

कुरियर सेवा में पिछले पांच साल में गांव में मैंने बहुत परिवर्तन देखे हैं। शुरू शुरू में डरते डरते मैंने अमेजन और फ्लिपकार्ट से सामान मंगवाना प्रारम्भ किया। यह 2016 की बात है। तब कुरियर प्रतिनिधि गांव में घर पर आने को तैयार ही नहीं होते थे। एक दो पैकेट तो उन्होने यह कह कर मना कर दिये कि ‘सही पते पर कोई व्यक्ति मिला ही नहीं’ जब कि उन्होने आने या सम्पर्क करने का कोई यत्न ही नहीं किया था। फ्लिपकार्ट वाले तो कस्टमर केयर को सम्पर्क करने पर भी कोई सहायता नहीं कर सके। अमेजन वालों ने जरूर तत्परता दिखाई और उनके कहने के बाद कोई प्रतिनिधि बहुत कुड़बुड़ाते हुये पैकेट ले कर आता। अहसान भी जताता और कभी कभी साफ साफ अपना सेवा-शुल्क मांगता। पर यह चिरकुट व्यवहार साल-डेढ़ साल तक ही चला।

उसके बाद अमेजन ने डेलीह्वरी के माध्यम से पैकेट भेजने प्रारम्भ कर दिये। और तब मैं नीरज कुमार मिश्र जी से मिला। नीरज विश्वसनीय, विनम्र और अत्यंत कुशल कर्मचारी और व्यक्ति निकले। उनके साथ परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार होने लगा।

मचिये का पैकेट ले कर नीरज अपने भदोही के दफ्तर पंहुचे। वहां से उन्होने मुझे कुरियर चार्ज फोन पर बताया। मैंने घर बैठे पेमेण्ट किया और तुरंत ही उन्होने मोबाइल पर पैकेट बुक करने की रसीद मुझे प्रेषित कर दी।

पैकेट का बोझ जो हमारे सिर पर था; वह नीरज की तत्पर सेवा से हल्का हो गया। नीरज जी ने बताया कि चार दिन में रघुनाथ जी को नोयडा में वह डिलिवर हो जाने की सम्भावना है।

नीरज ने मेरे घर के बाहर अपनी मोटर साइकिल पर बड़ी कुशलता से मचिया का पैकेट बांधा। बांधने के लिये मोटी एलास्टिक की हुक लगी डोरी उनकी मोटर साइकिल में ही जुड़ी थी। उनके रवाना होते ही सामान का बोझ हमारे सिर से उतर गया।

गांवदेहात में रहते हुये साधन विपन्न मैं इससे बेहतर सर्विस की अपेक्षा नहीं कर सकता था। और गांव ही क्यों, शहर में भी नीरज जैसे तत्पर व्यक्ति का मिलना सौभाग्य ही है!


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