अरे वह क्रियेटिव – फन ही नहीं, देने की प्रसन्नता की आदत विकसित करना भी था।


आनंद को केंद्र में रख कर अपनी आदतें ढालने की एक सयास कोशिश की जा रही है। विचार यह है कि हम उसे पैसा खर्च कर, सामान खरीद कर, मार्केटिंग कर या इधर उधर की बतकही/परनिंदा कर नहीं, विशुद्ध प्रसन्नता की आदतें विकसित करने से करेंगे।

डेल्हीवरी के नीरज मिश्र जी मचिया का पैकेट ले गये आज!


मचिया के पैकेट का बोझ जो हमारे सिर पर था; वह नीरज की तत्पर सेवा से हल्का हो गया। नीरज जी ने बताया कि चार दिन में रघुनाथ जी को नोयडा में वह डिलिवर हो जाने की सम्भावना है।

2 मचिया बन गये अंतत:


मचिया के फ्रेम से मेरी पत्नीजी को एक और रचनात्मक काम मिल गया। … मैं बार बार जा कर उन्हे तन्मयता से पेण्ट करते देखता रहा। बहुत कुछ ऐसा भाव था उनके मन में जैसे कोई महिला एक शिशु को दुलार रही हो।

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