पिछले सप्ताह के मेरे कोविड19 विषयक ट्वीट्स


भविष्य की ट्वीट्स इसी तरह ब्लॉग पर लम्बे समय के लिये रखने और बाद में सर्च करने की सहूलियत के लिये संजोता रहूंगा।

कोविड19 और रोजमर्रा की जिंदगी – रीता पाण्डेय की अतिथि पोस्ट


आखिर, खाने कमाने के लिये कोई व्यक्ति अपने घर से दूर नहीं जाना चाहता। अपने परिवार के साथ रहना चाहता है। भले ही पगार थोड़ी कम मिले।

कोविड19, दहशत, और शहर से गांव को पलायन – रीता पाण्डेय की पोस्ट


यह दहशत शहर वालों का ही रचा हुआ है! वहां है प्रदूषण, भागमभाग, अकेलापन और असुरक्षा। गंदगी शहर से गांवों की ओर बहती है। वह गंदगी चाहे वस्तुओं की हो या विचारों की। गांव में अभी भी किसी भी चीज का इस्तेमाल जर्जर होने तक किया जाता है। कचरा बनता ही कम है।

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