बंडी नुमा गंजी (बनियान)


घर परिसर में साइकिल चलाते समय गूगल फिट पर साइकिल अभ्यास का डाटा सृजित करना और साथ ही कोई पुस्तक या पॉडकास्ट सुनते रहना थोड़ा नियोजन मांगता है। गले में एक ब्ल्यूटूथ वाला नेकबैंड और पॉकेट में मोबाइल चाहिये। घर में सूटेड बूटेड रहना बेकार है। अपनी मेज पर बैठे जब मन ऊबे तो साइकिलContinue reading “बंडी नुमा गंजी (बनियान)”

कोहरा – साइकिलवाद से पैदलवाद की ओर


<<< कोहरा – साइकिलवाद से पैदलवाद की ओर >>> नये साल का संकल्प कि रोज दस हजार से ज्यादा कदम चलना है; सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने जैसा कुछ साबित हुआ। साल की शुरुआत ही मौसम के खराब होने और कोहरा गहराने से हुई। साइकिल चलाना तो कोहरे में सही नहीं था, घर परिसर मेंContinue reading “कोहरा – साइकिलवाद से पैदलवाद की ओर”

घर परिसर में साइकिल और मानसिक- यात्रा


मेरा मानसिक डूप्लीकेट नागेश्वर बहुधा मुझसे कहता है कि वह भी बूढ़ा हो रहा है। इससे पहले कि वह भी बिस्तर तक सीमित हो जाये या डिमेंशिया का शिकार हो, वह अभिव्यक्त हो जाना चाहता है। नागेश्वर का व्यक्तित्व मुझे निखारना-गढ़ना है।

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