विजय शंकर उपाध्याय


पूछने पर स्वत: बताने लगे वे सज्जन. सब पानी ने चौपट कर दिया. और अभी तक पानी लगा है. जमीन सूखी होती तो आलू, चना, मटर के पौधे बड़े हो रहे होते.

प्रयागराज में सवेरे साइकिल चलाना रुच रहा है


गांव और शहर दोनों के साइकिल भ्रमण के अपने अलग अलग चार्म हैं. मन अब दोनों से आकर्षित होता है.

प्रयागराज में सवेरे की साइकिल सैर


कुल 11 किलोमीटर साइकिल चलाई. यह लगा कि स्टेमिना इससे ज्यादा का है. बीच में एक जगह बिना चीनी की चाय का पड़ाव मिल जाए तो सिविल लाइंस तक का ट्रिप लगाया जा सकता है.

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