महाकालं, महाकालं, महाकालं नमोस्तुते!


त्रिपाठी जी और चौहान जी उन्हें साथ लेने आ चुके हैं। निकल ही लिये हैं प्रेमसागर महाकाल मंदिर के लिये। मैंने उन्हें शुभकामनायें दी। “हर हर महादेव भईया। ऐसे ही आशीर्वाद देते रहियेगा।” सुन कर मैं भी सेण्टीमेण्टल हो जाता हूं।

दौलतपुर से देवास


अच्छा लगा! यह रुक्ष कांवर यात्री मुझसे हास्य और विनोद का आदान-प्रदान करने की ओर खुला तो सही! आपसी सम्बंधों की बहुत सी बर्फ हम तोड़ चुके हैं। कई बार प्रेमसागर मुझसे झिड़की खा कर भी बुरा नहीं माने हैं। मेरी नसीहतें भले ही न मानी हों पूरी तरह; पर अवज्ञा का भाव कभी नहीं था। और अब यह हंसी ठिठोली – महादेव सही रूपांतरण कर रहे हैं अपने चेले का!

दौलतपुर के जंगल का भ्रमण


मसलन वन अधिकारी भी जंगल के वृक्षों में 5-10 को पहचानते हैं। यह तो वैसा ही हुआ कि घरनी को घर की चिंता ही नहीं है। महिला अपने एक दो बच्चों को नाम ले कर बुलाये और बाकी को सतकटा कह कर निपटा दे तो उस परिवार का भगवान ही मालिक।

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free