भोजेश्वर मंदिर और भोपाल


प्रेमसागर बतौर टूरिस्ट नहीं निकले हैं। वे तो कांवर ले कर सिर झुका कर जप करते हुये चला करते थे। बिना आसपास देखे। यह तो बदलाव उन्होने किया है कि यात्रा मार्ग में दृश्य और सौंदर्य में “कंकर में शंकर” के दर्शन करने का। वह बदलाव ही बहुत बड़ा बदलाव है।

भोजपुर पंहुचे प्रेमसागर


नामदेव जी के घर सत्कार, जय प्रकाश जी के दफ्तर में लोगों द्वारा सेवा और भोजेश्वर मंदिर के महंत जी से मुलाकात – यह सब उपलब्धि ही है। महादेव का कठिन पदयात्रा के दौरान उत्साह बढ़ाने को दिया प्रोत्साहन। चले चलो प्रेमसागर! हर हर महादेव का जयकारा लगाते चले चलो!

बाड़ी से बिनेका


रास्ता मैं यह बालक
हमको आते देखा तो दौड़ कर
हमको रोका और पानी पिलाया। और 8 अमरूद लाया
और बोला कि बाबा रास्ता में कोई गांव नहीं मिलेगा आप खा लीजिएगा।
महादेव जी उस बालक को लंबी उमर,
विद्या और बुद्धि दे। यही आशीर्वाद बच्चा को दिए हैं हम।

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