पक्षियों के बहाने बाभन की दशा — न लड़ सकते हैं, न आरक्षण है उनके लिये


इतिहास बताता है कि चुप वर्ग सबसे पहले टूटता है, और सबसे देर से सुना जाता है। हमारे घर में, हर सुबह आँगन में बिखरे फीके नमकीन पर जो दृश्य बनता है, वह प्रकृति का खेल नहीं लगता, एक छोटा-सा समाज लगता है। कौव्वे तेज़ी से आते हैं, तेज़ी से खाते हैं और ज़्यादा लेContinue reading “पक्षियों के बहाने बाभन की दशा — न लड़ सकते हैं, न आरक्षण है उनके लिये”

प्री-वेडिंग शूट! तेजी से बदल रहा है समाज


प्री-वेडिंग शूट हमारे लिये बिल्कुल नयी बात थी। लड़का लड़की बिल्कुल फिल्म शूटिंग के अंदाज में विभिन्न सीन में भिन्न भिन्न पोज और पोशाकों में स्क्रीन पर आ रहे थे।

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