सामुदायिक शौचालय – शोचालय


अभी तक तो पांच साल में कोई विधायक या सांसद मुझे दिखा नहीं (आम आदमी के पास आने की उनको क्या जरूरत?!) पर अब शायद नजर आयें। पूछने का मन है कि सामुदायिक शौचालयों के सफेद हाथी बने पर एक भी दिन चले नहीं, क्यों?

एक जंग सी छिड़ी है व्यवस्था और अराजकता के बीच


एक जंग सी छिड़ी है व्यवस्था और अराजकता के बीच
लोग न केवल स्टिकर निकाल ले रहे हैं, उन बोरियों को उठा कर सड़क के डिवाइडर पर वाहन कुदाने के लिये रैम्प जैसा बनाने में भी प्रयोग कर रहे हैं। … भयंकर अराजक-जुगाड़ देश है यह!

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free