छुट्टी: चिठ्ठे पढ़ने का बकाया निपटाया जाये!



पहले कानपुर में रेल दुर्घटना हुई. फिर लोगों ने उसपर बहुत से सवाल पूछे. लोगों को जवाब देते बड़ा अच्छा लग रहा था, यद्यपि शरीर थका था. कल भी दफ्तर में निर्णय के लिये फाइलों का ढ़ेर और डाक बक्सा भरा था. रोज की ब्लॉग पोस्ट लिखने का स्व निर्धारित नियम पालन करने के जुनून ने और थका दिया. नींद की गोलियां और मां की डांट भी करगर न रही. कल सुकुल जी ने टोक भी दिया कि लगता है आज नागा कर गये मिस्टर ज्ञानदत्त.
सो, सप्ताहांत की आकस्मिक छुट्टी ले रहा हूं आप सब से. थकान पूरी कर गूगल रीडर पर ब्लॉग रीडिंग का बकाया पूरा करूंगा. लोगों के ब्लॉग पर पढ़ कर टिप्पणियां भी करनी हैं – वर्ना हम नॉन-एलाइण्ड ब्लॉगर की पोस्ट पर कौन आयेगा!
नमस्कार.
(हो सके तो इस मुन्नी पोस्ट पर भी कुछ शब्द टिपेर दीजियेगा!)