घना कुहासा – एक सूचना


सवेरे सवेरे मेरे गाड़ी-नियन्त्रण कक्ष ने सूचना दी कि गाजियाबाद-कानपुर-झांसी रेल खण्ड में घना कुहासा है। आगरा-बांदीकुई और मथुरा-पलवल खण्ड में भी यही हालत है। कुहासा होने की दशा में ट्रेनें धीमी (सुरक्षित) गति से चलती हैं। स्टेशन के पहले पटरी पर पटाखे लगाये जाते हैं, जिससे उसकी ध्वनि से ट्रेन चालक सतर्क हो जायेContinue reading “घना कुहासा – एक सूचना”

सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिं


सुनना हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग है। सुनाने से कहीं ज्यादा सुनने का महत्व है। सुनने का महत्व, जानने के लिये हो – यह जरूरी नहीं। जानने के लिये तो देखना-सुनना है ही। सुनने के लिये भी सुनना है। जीवन की आपाधापी में सुनना कम हो गया है। तनाव और व्यग्रता ने सुनाना बढ़ा दियाContinue reading “सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिं”