हीयरिंग एड – फुल-पेज विज्ञापन का समाज और अर्थशास्त्र


सुबह के अखबार में जब कोई उत्पाद आधा कॉलम लेता है, तो वह हमें अपने बारे में कुछ बताता है। लेकिन जब कोई कंपनी पूरा पहला पन्ना खरीद ले—और उस पर किसी सुपरस्टार को रख दे—तो वह समाज, अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता मनोविज्ञान, तीनों स्तर पर गहरे से प्रभाव डालती है। कुछ दिन पहले जो फुल-फांटContinue reading “हीयरिंग एड – फुल-पेज विज्ञापन का समाज और अर्थशास्त्र”

किर्रू लेवल की जर्दालू डिप्लोमेसी


मनोहर श्याम जोशी जी की किताब है – नेता जी कहिन। पाँच–सात किताबें लोगों को उपहार दे चुका हूँ। यहाँ तक कि मेरी प्रति भी कोई सज्जन ले गये तो ले कर भूल गये। सो एक प्रति हफ्ता भर पहले फिर खरीदी। उसी में पत्नीजी ने पढ़ा – जर्दालू की किर्रू लेवल भेंट के बारेContinue reading “किर्रू लेवल की जर्दालू डिप्लोमेसी”

आदर्श चीफ ट्रेन कंट्रोलर गोस्वामी जी


नीलकंठ बरियापुर के रिटायरमेंट होम में तैयार हो कर सैर पर निकलने जा रहा है। वह जूते—स्पोर्ट्स शू—पहन रहा था। झुकते ही कमर में हल्का दर्द उठा। सत्तर साल की उम्र में कभी इधर, कभी उधर दर्द होना अब रूटीन है। उससे क्या शिकायत?शरीर अपनी उम्र याद दिलाता रहता है, पर मन अपनी नहीं मानता।Continue reading “आदर्श चीफ ट्रेन कंट्रोलर गोस्वामी जी”

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