
नियमित लिखना नहीं हो रहा, पर प्रेमसागर फोन कर या ह्वाट्सएप्प कर बता देतें है अपनी दंड यात्रा का हाल। घाघा से आगे निकल चुके हैं। सहस्त्रधारा पीछे छूट गई है। किसी अहमदपुर में वन विभाग के रेस्ट हाउस में शाम गुजार रहे थे। वन विभाग के डिप्टी साहब साथ में थे।
नर्मदा माई की कृपा से अच्छी चल रही है यह कठिन यात्रा।
दो रोज पहले एक सज्जन नोतमदास बैरागी जी के यहां रहे थे वे घोघा में। बैरागी जी ने सवेरे साढ़े पांच बजे उषाकाल में प्रेमसागर के दंड शुरू करते का वीडियो बना भेजा था। उस वीडियो को देख कर ही अंदाज हो जाता है इस पूरे कार्य की कठिनाई का।
वीडियो में प्रेमसागर पिछली शाम के बनाये चिन्ह की मिट्टी को समतल करते हैं। अपना फेंटा बांध कर कान पकड़ तीन बार उट्ठक-बैठक लगाते हैं — शायद ईश्वर से या नर्मदा माई से भूल – चूक के लिये क्षमा याचना के प्रतीक के रूप में। उसके बाद उनका बैठने-लेटने-चिन्ह लगाने और उठ कर चिन्ह तक आगे बढ़ने का क्रम प्रारम्भ होता है।
पास में कोई मंदिर है, जिसपर मानस की चौपाई का पाठ हो रहा है लाउडस्पीकर पर।
सवेरे का समय और दंड भरते प्रेमसागर — धर्म के प्रति श्रद्धा भी जगती है और यह प्रश्न भी कि काहे यह कर रहे हैं वे। क्या कोई और तरीका नहीं है आध्यात्मिकता का? यह अपनी मन की सारंगी के तार कुछ ज्यादा कसना नहीं है? इतना कसना कि जीवन संगीत ही अलग सा हो जाये। क्या इसमें यात्रा की सरलता है या कठिन यात्रा का अभिमान?
वे मुझे बताते हैं — भईया, कार से चलते लोग भी रुक कर पानी पिलाते हैं। कोई तो डाभ भी ले आते हैं पिलाने के लिये।
गर्मी बहुत पड़ रही है। सड़क का डामर इतना गरम हो जाता है कि 9-10 बजे रुकना पड़ता है। शाम को भी दंड भरना कठिन है, पर फिर भी चलते हैं। रोज 4-5 किलोमीटर दंड भरा जा रहा है।
हांथों, सीने और पेट पर छाले पड़ जा रहे हैं। छाले फूट भी जाते हैं। बोरो – प्लस पास में है छालों पर लगाने को।
“भईया अभी तो सड़क किनारे पेड़ नहीं हैं पर डिप्टी साहब बता रहे हैं आगे सागौन के जंगल मिलेंगे तो छाया रहेगी। छाया में दूरी ज्यादा तय हो पायेगी।” — प्रेमसागर ने बताया।
मैने सोचा था कि घाघा के बैरागी जी से फोन पर बात करूंगा। उनका आश्रम नर्मदा से एक किलोमीटर पर है। पर वह हो नहीं पाया। यात्रा के लोगों से जुड़ने का अर्थ है रोज प्रेमसागर के लिये 3-4 घंटे का समय निकाल कर जानकारी संजोना और लिखना। उसका न साहस बन रहा है न अनुशासन।
शायद कोई ऐसा व्यक्ति हो जो प्रेमसागर की दंड-नर्मदा-परिक्रमा पर वीडियो या रील बना कर पोस्ट करता हो तो वह सरल तरीका हो यात्रा की जानकारी साझा करने का। वह मेरी सम्प्रेषण विधा नहीं है।
प्रेमसागर एक विलक्षण यात्रा कर रहे हैं। पर वैसी विलक्षण प्रस्तुति — नियमित और विस्तृत मैं कर नहीं पा रहा। पर तब भी अच्छा लगता है जब प्रेमसागर मुझे अपनी यात्रा जानकारी साझा करते हैं।
