साइकिल से घुमक्कडी करते कुंदन आर्य 


गांवदेहात डायरी वह नौजवान साइकिल पर आगे एक बोर्ड लगाये था और पीछे कैरियर पर एक बैग। पहली नज़र में लगा—कोई फेरीवाला होगा, जो सवेरे-सवेरे निकल पड़ा है। गांव में ऐसे फेरीवाले अक्सर दिख जाते हैं। जिज्ञासा हुई तो मैंने अपनी साइकिल आगे बढ़ाई और बोर्ड पढ़ा। तब पता चला—वे फेरीवाले नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर (बिहार)Continue reading “साइकिल से घुमक्कडी करते कुंदन आर्य “

होरमुज़ बंदी और रसोई के कार्बन फुटप्रिंट 


गांवदेहात डायरी युद्धों का असली प्रभाव विभीषिकाओं और त्रासदियों में नहीं, लोगों की आदतों में होने वाले परिवर्तन में दिखाई देता है। फारस की खाड़ी और होरमुज़ जलडमरूमध्य मेरे गांव से लगभग 2600 किलोमीटर दूर है। वहां क्या हो रहा है—इससे गांव वालों को सीधा कोई लेना-देना नहीं। पर उसका असर यहां तक पहुंचा है।Continue reading “होरमुज़ बंदी और रसोई के कार्बन फुटप्रिंट “

सवेरे के सपने 


धूमिल यादें प्रोस्टेट की दवाई अब अपने हिसाब से काम करने लगी है। रात में दो-तीन बार उठना होता है, कभी-कभी चार बार भी। किताबों में और यूट्यूब वाले बताते हैं कि शाम छह बजे के बाद पानी न पिया जाए, तो बेहतर रहता है। पर वह सब किताबी बातें हैं। रात तीन बजे नींदContinue reading “सवेरे के सपने “

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