गांवदेहात डायरी सालों बाद कटका के प्लेटफार्म नम्बर 2 पर गया। वहीं मिला हरिहर। अंधा है वह। हाथ में एक लाठी, बगल में एक झोला—जिसमें बिस्कुट के पैकेट। उन्हीं को लेकर वह ट्रेनों के कॉरिडोर में चलता और बेचता है। हरिहर प्लेटफार्म पर बैठने लगा तो किसी ने आगाह किया—“ट्रेन आवे वाली बा। आगे बैठबेContinue reading “हरिहर से बातचीत”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
जातियों में बंटी औरतें
गांवदेहात डायरी यहां गांवदेहात में गांव कई हिस्सों में बंटा है—ब्राह्मण, केवट, पासी और चमरउट। इनके पुरुष अलग-अलग व्यवसाय में हैं और महिलाओं का जीवन भी अलग-अलग तरह से चलता दिखता है। मैं इन्हें हाशिये से देखता हूं; बहुत-सी बातें पत्नीजी से सुनकर समझता हूं। हर हिस्से में महिलाओं की स्वतंत्रता, उनके काम और घर-समाजContinue reading “जातियों में बंटी औरतें”
युद्ध से मुक्ति की जुगत
गांवदेहात डायरी तीन दिन से हमने गैस स्टोव का प्रयोग नहीं किया। हम लाई-चना या केले पर जिंदा नहीं रहे, न ही बाजार से पका हुआ भोजन खरीदा। घर में रोटी, पराठा, सब्जी, दाल, चावल—सब कुछ बना। स्वाद भी मिला और पौष्टिकता भी बनी रही। हमने न लकड़ी जलाई, न उपले खरीदे, न कोयले काContinue reading “युद्ध से मुक्ति की जुगत”
