सवेरे समय से निकलना। रास्ते को देखते चलना। पगला बाबा से मुलाकात और सांझ ढलने के पहले मुकाम पर पंहुच जाना – बहुत बढ़िया चले प्रेमसागर! ऐसे ही चला करो, दिनो दिन। तब तुम पर खीझ भी नहीं होगी। प्रेम पर प्रेम बना रहेगा।
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
प्रेमसागर – सिहोर होते हुये आष्टा
रास्ते में उन्हें कई जैन मंदिर मिले। इलाका में जैन प्रभाव वाला है। एक स्थान पर उन्होने बहुत आग्रह किया भोजन करने का। मना करने पर उन्होने प्रेमसागार की जेब में कुछ रकम रख दी – कि जब वे भोजन करना चाहें, उससे कर सकें।
भोपाल के आगे निकले प्रेमसागर
लगभग 10 हजार किलोमीटर यह ज्योतिर्लिंग यात्रा है। उसका 12-15% अभी तक सम्पन्न हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। इससे यह विश्वास पुख्ता हुआ है कि प्रेमसागर यात्रा सम्पन्न करने में सक्षम हैं।
