प्रणाम; आपका स्वागत नहीं है!


यह ऊबड़खाबड़ सड़क; यह सवेरे सवेरे “गुडनाइट सर” का जोर से जयकारा लगाते भगवान दास का हंसता मुस्कराता चेहरा; सड़क किनारे निपटती बच्ची का अभिवदन करना – “बब्बा पालागी”; का आनंद लो। कहां इन बभनों के फेर में अपनी मानसिक शांति बरबाद करते हो!

आष्टा से दौलतपुर – जुते खेत और पगला बाबा


सवेरे समय से निकलना। रास्ते को देखते चलना। पगला बाबा से मुलाकात और सांझ ढलने के पहले मुकाम पर पंहुच जाना – बहुत बढ़िया चले प्रेमसागर! ऐसे ही चला करो, दिनो दिन। तब तुम पर खीझ भी नहीं होगी। प्रेम पर प्रेम बना रहेगा।

प्रेमसागर – सिहोर होते हुये आष्टा


रास्ते में उन्हें कई जैन मंदिर मिले। इलाका में जैन प्रभाव वाला है। एक स्थान पर उन्होने बहुत आग्रह किया भोजन करने का। मना करने पर उन्होने प्रेमसागार की जेब में कुछ रकम रख दी – कि जब वे भोजन करना चाहें, उससे कर सकें।

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