अभी तक तो पांच साल में कोई विधायक या सांसद मुझे दिखा नहीं (आम आदमी के पास आने की उनको क्या जरूरत?!) पर अब शायद नजर आयें। पूछने का मन है कि सामुदायिक शौचालयों के सफेद हाथी बने पर एक भी दिन चले नहीं, क्यों?
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
शारदा परसाद बिंद – चकरी कूटने वाला
गरीब आदमी शारदा। शायद उसे आठ दस हजार का माइक्रो फाइनांस मिले तो वह उपयुक्त औजार खरीद कर अपनी आमदनी बढ़ा सके। पर कोई भी कर्ज किसी काम के लिये लिया जाये, किसी न किसी और मद में खर्च हो ही जाता है।
गांव की सड़क पर बारिश के मौसम की शाम
मैं देर तक रुका नहीं; यद्यपि सांझ के गोल्डन ऑवर की सूरज की किरणों में वह जगह बहुत आकर्षित कर रही थी। मैंने अपने को दो – ढाई हजार साल के अतीत के टाइम फ्रेम से अपने को वर्तमान में धकेला और घर के लिये रवाना हो गया।
