पुच्चू


दुनियां में करोड़ों कमाने वाले हैं, पर किसी की सहायता के लिये दस रुपया नहीं निकालते। यहां पुच्चू अपना सब कुछ देने में एक क्षण भी पुनर्विचार नहीं करता।

गिरीश केसरी का शोरूम


गिरीश जी के शोरूम से लौटते समय दो चीजें मेरे मन में छायी रहीं – एक तो गिरीश जी की विनम्रता और सज्जनता (कोई शक नहीं कि वे सफल व्यवसायी हैं), और दूसरे मध्यवर्ग के बारे में मेरा अपना बदला नजरिया।

सूर्यमणि तिवारी, हर्ष मिश्र और नचिकेता


हर्ष को देख कर मुझे लगा कि कठोप्निषद मात्र काव्य कल्पना नहीं। ऐसा पात्र, ऐसा नायक, हो सकता है।

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