घर आकर चिन्ना (पद्मजा) पाण्डे ने बताया कि स्कूल में बच्चे उसपर doggerel (निरर्थक बचपन की तुकबंदी) कहते हैं – पद्मजा पान्दे (पद्मजा पाण्डे)चूनी धईके तान्दे (चोटी धर कर – पकड़ कर तान दे)खटिया से बान्दे (खटिया से बाँध दे) डॉगरेल बचपन के कवित्त हैं। निरर्थक, पर उनमें हास्य, व्यंग, स्नेह, संस्कृति, भाषा – सभीContinue reading “पद्मजा पान्दे, चूनी धईके तान्दे…”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
पुस्तक कब पढ़ी मानी जाये?
रिटायरमेण्ट के बाद जब मित्र भी नहीं बचते (शहर के मित्र शहर में छूट गये, गांव के अभी उतने प्रगाढ़ बने नहीं) तो पठन ही मित्र हैं। दिन भर लिखा पढ़ने में बहुत समय जाता है। पर बहुत व्यवस्थित नहीं है पठन। गांव में अखबार वाला समाचारपत्र बड़ी मुश्किल से देता है। पत्रिकायें नहीं मिलतीं।Continue reading “पुस्तक कब पढ़ी मानी जाये?”
विजय तिवारी जी का आत्मकथ्य
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