रामेश्वर जैसे लोग कर्जे में डूबे हैं। पगार शराब पीने और लोन चुकाने में चली जाती है और अगले महीने का राशन भी बनिया की दुकान से उधार आता है। शराब और उधार; उधार और शराब – यही नियति है रामेश्वर जैसों की।
Author Archives: Rita Pandey
दसमा – अतीत भी, वर्तमान भी #ग्रामचरित
दसमा दोमंजिले मकान में साफसफाई के लिये नीचे-ऊपर सतत दौड़ती रहती थी। मेरी बड़ी मां को वह एक अच्छी सहायिका मिल गयी थी। लीक से हट कर काम कराने के लिये बड़ी मां उसे दो रुपया और ज्यादा गुड़ देती थीं।
गांव में बाटी चोखा – और बाटी प्रकृति है
जया ने कहा – अब दम मारने की फ़ुर्सत मिली है। मौसम भी अच्छा है। गर्मी ज्यादा नहीं है। ऐसे में दाल-बाटी का इन्तजाम होना चाहिये। नहीं?
