दो दिन से राजन भाई मेरे घर आ रहे हैं। दस साल पहले वे मुझे साइकिल के जोड़ीदार बन कर यहां गांवदेहात का करीब 10 वर्ग किलोमीटर का एरिया दिखाने वाले थे। एक एक चप्पा चप्पा – नदी, ताल, खेत और लोग हमने देखे। पर कालांतर में उनका साइकिल चलाना और मेरे घर पर आनाContinue reading “बढ़ती उम्र, साइकिल और नई पीढ़ी”
Category Archives: ग्राम्यजीवन
बंडी नुमा गंजी (बनियान)
घर परिसर में साइकिल चलाते समय गूगल फिट पर साइकिल अभ्यास का डाटा सृजित करना और साथ ही कोई पुस्तक या पॉडकास्ट सुनते रहना थोड़ा नियोजन मांगता है। गले में एक ब्ल्यूटूथ वाला नेकबैंड और पॉकेट में मोबाइल चाहिये। घर में सूटेड बूटेड रहना बेकार है। अपनी मेज पर बैठे जब मन ऊबे तो साइकिलContinue reading “बंडी नुमा गंजी (बनियान)”
चकरी से दाल दलने का उपक्रम
खेती की रहर (अरहर) थोड़ी सी मिली। एक बोरी। उसको दलवाने के लिये पत्नीजी ने दो महिलाओं को बुलाया। एक दिन उन्होने एक राउण्ड चकरी चला कर उसके टुकड़े किये। दूसरी मंजिल पर उन्होने डेरा जमाया था। चकरी चलने की आवाज गड़गड़ाती हुई दिन भर आती रही मानो आसमान में मेघ गड़गड़ा रहे हों। दालContinue reading “चकरी से दाल दलने का उपक्रम”
