गौतम शंकर बैनर्जी


उस दिन शिव कुमार मिश्र ने आश्विन सांघी की एक पुस्तक के बारे में लिखा, जिसमें इतिहास और रोमांच का जबरदस्त वितान है। सांघी पेशेवर लेखक नहीं, व्यवसायी हैं। कुछ दिन पहले राजीव ओझा ने आई-नेक्स्ट में हिन्दी ब्लॉगर्स के बारे में लिखा जो पेशेवर लेखक नहीं हैं – कोई कम्प्यूटर विशेषज्ञ है, कोई विद्युतContinue reading “गौतम शंकर बैनर्जी”

निठल्ला


बिना अपना काम किये कैसे जिया जा सकता है? पिछले डेढ़ महीने मेरे लिये बहुत यातनामय रहे, जब मेरी कार्यक्षमता कम थी और सरकारी काम के प्रति पूरा न्याय नहीं हो पा रहा था। पढ़ा कि कई उच्च मध्य वर्ग की महिलायें स्कूल में मास्टरानियों के पद पर हैं। पर स्कूल नहीं जातीं। अपना हस्ताक्षरContinue reading “निठल्ला”

उम्र की फिसलपट्टी उतरता सीनियरत्व


मैने यह पोस्ट पोस्ट न की होती अगर मुझे प्रवीण की एक नई पोस्ट के बारे में सूचना देने की कवायद न करनी होती। यह पोस्ट ड्राफ्ट में बहुत समय से पड़ी थी। और अब तो काफी घटनायें गुजर चुकी हैं। ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के काण्ड के लिये बापी महतो को पकड़ा जा चुका है (अच्छाContinue reading “उम्र की फिसलपट्टी उतरता सीनियरत्व”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free