श्वान मित्र संजय


कछार में सवेरे की सैर के दौरान वह बहुधा दिख जाता है। चलता है तो आस पास छ-आठ कुत्ते चलते हैं। ठहर जाये तो आस पास मंडराते रहते हैं। कोई कुत्ता दूर भी चला जाये तो पुन: उसके पास ही आ जाता है। कुत्ते कोई विलायती नहीं हैं – गली में रहने वाले सब आकारContinue reading “श्वान मित्र संजय”

पिलवा का नामकरण


जवाहिरलाल मुखारी करता जाता है और आस पास घूमती बकरियों, सुअरियों, कुत्तों से बात करता जाता है। आते जाते लोगों, पण्डा की जजमानी, मंत्रपाठ, घाट पर बैठे बुजुर्गों की शिलिर शिलिर बातचीत से उसको कुछ खास लेना देना नहीं है। एक सूअरी पास आ रही है। जवाहिर बोलने लगता है – आउ, पण्डा के चौकीContinue reading “पिलवा का नामकरण”

बायोडाइजेस्टर टॉयलेट – प्रयोग पर फीडबैक


मैने एक पोस्ट तीन महीने पहले लिखी थी – बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस और बायोडाइजेस्टर टॉयलेट। इसमें रेलवे द्वारा बुंदेलखण्ड एक्सप्रेस में नये प्रकार के टॉयलेट्स प्रयोग में लाने के बारे में था। मैने लिखा था – (यह बायोडाइजेस्टर) बैक्टीरिया सियाचिन ग्लेशियर पर सेना के टॉयलेट्स का ठोस अपशिष्ट पदार्थ क्षरित करने के लिये प्रयोग में लायाContinue reading “बायोडाइजेस्टर टॉयलेट – प्रयोग पर फीडबैक”

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