पण्डित नेहरू का मुख्य मंत्रियों को लिखा एक पत्र


यह न केवल गलत है, बल्कि विनाश का मार्ग है… … मैने ऊपर कार्यकुशलता; और परम्परागत लीकों से बाहर निकलने की चर्चा की है। इसके लिये जरूरी है कि हम आरक्षण और किसी विशेष जाति या वर्ग को कुछ विशेष रियायतें/अधिकार देने की पुरानी आदत से निजात पायें। हमने जो हाल ही में बैठक रखीContinue reading “पण्डित नेहरू का मुख्य मंत्रियों को लिखा एक पत्र”

टेलीवीजन विज्ञापन – कहां तक पहुंचेगी यह स्थिति!


मैं टीवी का दर्शक नहीं रहा – कुछ सालों से। मेरे परिवार ने उसका रिमोट मेरे हाथ से छीन लिया और मैने टीवी देखना बन्द कर दिया। बिना रिमोट टीवी क्या देखना? रिमोट की जगह कम्प्यूटर के माउस का धारण कर लिया मैने।टेलीविजन विज्ञापन पर यह पोस्ट मेरे ब्लॉग पर श्री गोपालकृष्ण विश्वनाथ ने बतौरContinue reading “टेलीवीजन विज्ञापन – कहां तक पहुंचेगी यह स्थिति!”

दफ्तर बनाम वेटिंग रूम!


मेरा दफ्तर का कक्ष मेरे कमरे में चपरासी कार्ड पंहुचाता है – इम्प्रेसिव से लगने वाले कार्ड पर किसी फर्म के वरिष्ठ अधिकारी का लिखा नाम। फर्म का नाम पहचाना नहीं है। मेरे पास कोई अर्जेण्ट काम भी नहीं है। लिहाजा कमरे में बुलवाने में कोई हर्जा नहीं। सज्जन के कमरे में घुसने से पहलेContinue reading “दफ्तर बनाम वेटिंग रूम!”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free