दिनेश पगला


ऐसे चरित्र रोज रोज नहीं मिलते। पहले मुझे लगा कि वह कुछ मानसिक रूप से सरका हुआ है। पर उसने बताया कि गांव के आसपास के भगत लोगों के साथ उत्तराखण्ड, झारखण्ड, गया आदि कई जगहों पर पैदल यात्रा कर चुका है।

स्वास्थ्य का स्रोत – घर का बगीचा


कण्डाल से एक छोटी प्लास्टिक की बालटी में पानी ले कर वे हर पौधे के पास जाती हैं और उसकी जरूरत अनुसार पानी उनकी जड़ों में उड़ेलती हैं। पानी कण्डाल से लेने, चलने, झुकने आदि में जो व्यायाम है, वह पत्नीजी के स्वास्थ्य को पुष्ट करता है।

विश्वनाथ के घुटने की तकलीफ


वह मुझे अपना घुटनों पर मलने वाला तेल दिखाता है। एक सौ बीस रुपये की छोटी शीशी। चीता मार्क घुटनों की मालिश का तेल। मुझे वह शीशी बहुत अच्छी नहीं लगती, पर विश्वनाथ का कहना है कि उससे आराम मिलता है।

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