दिहाड़ी मिलना कठिन है क्या इस समय?


मेरे पास बेरोजगारी के आंकड़े नहीं हैं। पर रोज दफ्तर जाते समय दिहाड़ी मजदूरी की प्रतीक्षारत लोगों को देखता हूं। इस बारे में फरवरी में एक पोस्ट भी लिखी थी मैने। तब जितने लोग प्रतीक्षारत देखता था उससे कहीं ज्यादा इस समय बारिश के मौसम में वहां प्रतीक्षारत दीखते हैं। क्या मजूरी मिलना कठिन होContinue reading “दिहाड़ी मिलना कठिन है क्या इस समय?”

बुर्कीना फासो से आने को आतुर धन


रोज ४०-५० धन बांटने को आतुर स्पैम आते हैं! रोज संदेश भेजता है वह मेरा अनजान मित्र। (एक ही नहीं अनेक मित्र हैं।) बैंक ऑफ अफ्रीका मेरे पास धन भेजने को आतुर है। मैं हूं, कि अपरिग्रह के सिद्धान्त से बंधा, वह संदेश पट्ट से डिलीट कर देता हूं। यह मित्र रूप बदलता है –Continue reading “बुर्कीना फासो से आने को आतुर धन”

कार्बन टेक्स और कार्बन क्रेडिट


ट्रक वालों की हड़ताल थी तो कुछ सुकून था। सड़क कुछ खाली लगती थीं। प्रदूषण कुछ कम था। यह अलग बात है कि कुछ लोग आगाह कर रहे थे कि खाने-पीने का सामान जमा कर लो – अगर हड़ताल लम्बी चली तो किल्लत और मंहगाई हो जायेगी। पर बड़ी जल्दी खतम हो गयी हड़ताल। ट्रकोंContinue reading “कार्बन टेक्स और कार्बन क्रेडिट”

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