मैकदोनाल्द में देसी बच्चे


चार थे वे। आइसक्रीम ले कर काउण्टर से ज्यादा दूर चल कर सीट तलाशने का आत्मविश्वास नहीं था उनमें। सबसे नजदीक की खाली दो की सीट पर चारों बैठे सहमी दृष्टि से आस-पास देखते आइस्क्रीम खा रहे थे। मैं आशा करता हूं कि अगली बार भी वे वहां जायेंगे, बेहतर आत्मविश्वास के साथ। मैकदोनाल्द काContinue reading “मैकदोनाल्द में देसी बच्चे”

टाटा नैनो, बाय-बाय!


नैनो परियोजना बंगाल से जा रही है। मशीनरी बाहर भेजी जा रही है। चुनाव का समय आसन्न है। साम्यवादी शासन मुक्त हुआ। अब जनता में सर्वहारा समर्थक छवि लाई जा सकती है। ब्लॉगजगत में भी अब मुक्त भाव से उद्योगपतियों की निंदा वाली पोस्टें आ सकती हैं। टाटा नैनो, बाय-बाय! यह नैनो (गुजराती में नानोContinue reading “टाटा नैनो, बाय-बाय!”

चुनाव, त्यौहार, बाढ़ और आलू


मैं तो कल की पोस्ट – "आलू कहां गया?" की टिप्पणियों में कनफ्यूज़ के रास्ते फ्यूज़ होता गया। समीर लाल जी ने ओपनिंग शॉट मारा – "…मगर इतना जानता हूँ कि अर्थशास्त्र में प्राइजिंग की डिमांड सप्लाई थ्योरी अपना मायने खो चुकी है और डिमांड और सप्लाई की जगह प्राइज़ निर्धारण में सट्टे बजारी नेContinue reading “चुनाव, त्यौहार, बाढ़ और आलू”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free