कलमा कुरान छल्ला कशी द्वारा रोज़ी रोटी


महराजगंज कस्बे में हाईवे के ओवर ब्रिज़ की दीवार पर पेंट किये इन शब्दों का इश्तिहार मुझे समझ नहीं आया। इतना जरूर लगा कि यह मानव के अज्ञात, रूहानी भय को; और उसको किसी न किसी तरह अपने पक्ष में मोड़ने का भरोसा देने का व्यवसाय भारत में करोड़ों-अरबों का है। और यह सब इनफार्मलContinue reading “कलमा कुरान छल्ला कशी द्वारा रोज़ी रोटी”

उमरहाँ के राकेश मिसिर जी


राकेश जी को छोड़ने के लिये मैं घर के गेट तक गया। उनके जाते हुये मन में विचार आया कि घर में किसी के आने पर उन्हें चाय परोसी जाये तो (लौंग-इलायची भले हो न हो) साथ में तश्तरी में एक चुनौटी और सुरती होनी ही चाहिये।

तिरंगा और जलेबी


मेरी जलेबी ठण्डी न हो जाये, इसलिये घर पंहुचने की जल्दी थी। अन्यथा इस राष्टीयता के बाजर की चहल पहल को और इत्मीनान से देखता।

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