मानसून जागा तो गाँव के मन में फिर से उम्मीद भी जाग उठी आज बारिश हुई। पकौड़े बनाने-खाने का बहाना भी मिल गया। लेकिन मन में एक और हिसाब चलता रहा। आज की बारिश जोड़ भी ली जाए, तब भी शायद इस मौसम में जिले में सामान्य से लगभग 80 प्रतिशत कम वर्षा हुई होगी।Continue reading “बारिश पर सोच”
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मेरे बाबा का समय
एक पोते की स्मृति और अपना ही भविष्य टटोलने की कोशिश। मैं छोटा था। चार साल का। बब्बा एक लाठी लिए, धोती-बंडी पहने स्कूल को निकलते थे। पास के गांव शम्भू के पूरा में प्राइमरी के हेड मास्टर थे। बच्चे बहुत डरते थे। बड़े भी उन्हें आते देख पगडंडी से नीचे उतर जाते थे। अपनेContinue reading “मेरे बाबा का समय”
The World Is Wrinkled — थॉमस फ्रीडमैन की पुस्तक पर सीक्वेल
फ्रीडमैन ने दुनिया को वहाँ से देखा जहाँ नई सड़कें बन रही थीं। मैं उसे वहाँ से देख रहा हूँ जहाँ उन सड़कों पर चलते वाहनों ने पैदल चलने की ताकत घटा दी है। थॉमस फ्रीडमैन का ताजा लेख है न्यूयॉर्क टाइम्स में – Everybody Is a Loser in This Middle East War. वह लेखContinue reading “The World Is Wrinkled — थॉमस फ्रीडमैन की पुस्तक पर सीक्वेल “
