उच्च-मध्य वर्ग की अभद्र रुक्षता


तेज ब्रेक लगाने से मेरा वाहन रुक गया. हमारे ड्राइवर ने देखा कि ट्रैफिक सिगनल अचानक लाल हो गया है. वाहन स्टॉप-लाइन से तीन-चार कदम आगे चला गया था. ड्राइवर ने वाहन धीरे से बैक करना प्रारम्भ कर दिया. तब तक पीछे एक कार रुक चुकी थी. कार वाले ड्राइवर ने जोर से हॉर्न दिया.Continue reading “उच्च-मध्य वर्ग की अभद्र रुक्षता”

मैं अंग्रेजी से नकल का जोखिम ले रहा हूं


रीडर्स डाइजेस्ट के अगस्त-2007 अंक में “गिविंग बैक” स्तम्भ में “फ्रूट्स ऑफ प्लेण्टी” नामक शीर्षक से पद्मावती सुब्रह्मण्यन का एक लेख है (पेज 39-40). मुम्बई में 66 वर्षीया सरलाबेन गांधी हर रोज 6 दर्जन केले खरीदती हैं. इतने केले क्यों? कितने नाती-पोते हैं उनके? सरलाबेन केले ले कर 300 मीटर दूर घाटकोपर के राजवाड़ी म्युनिसिपलContinue reading “मैं अंग्रेजी से नकल का जोखिम ले रहा हूं”

रेल दुर्घटना – कितने मरे हैं जी?


अमन चैन के माहौल में कल दफ्तर में बैठा था. कुछ ही समय पहले श्रीश के ब्लॉग पर हरयाणवी लतीफे पर टिप्पणी की थी. अचानक सवा बारह बजे कण्ट्रोल रूम ने फोन देने शुरू कर दिये कि जोधपुर हावडा एक्सप्रेस का कानपुर सेण्ट्रल पहुंचने के पहले डीरेलमेण्ट हो गया है. आलोकजी की माने तो मुझेContinue reading “रेल दुर्घटना – कितने मरे हैं जी?”

बाप का घर समझ रख्खा है क्या?


मेरे मित्र के पिताजी अकेले आज़मगढ़ में रहते थे. मित्र के साथ रहने को तैयार नहीं थे. वृद्धावस्था की समस्यायें थीं और बढ़ती जा रही थीं. मां के देहावसान के बाद का एकाकीपन झेलते; पर बिना बोले अपना जीवन के प्रति नकारात्मक रुख पुख्ता करते; पिताजी को कैसे अपने पास लाने को राजी करें –Continue reading “बाप का घर समझ रख्खा है क्या?”

कोई किसी को पानी भी नहीं पिलायेगा!


बाबा भारती और डाकू खड़ग सिंह की कहानी हम सब पढ़ कर बड़े हुये हैं. बाबा भारती के घोड़े सुल्तान को डाकू खड़ग सिंह अपहृत करने में कामयाब होता है. बाबा भारती उसे बुला कर कहते हैं – घोड़ा ले जाओ पर यह मत कहना कि किस प्रकार से तुमने चुराया है. अन्यथा लोग गरीबोंContinue reading “कोई किसी को पानी भी नहीं पिलायेगा!”

सुरियांवां, देवीचरण, टाई और नमकीन!


देवी चरण उपाध्याय तो उम्मीद से ज्यादा रोचक चरित्र निकले! कल की पोस्ट पर बोधिसत्व जी ने जो देवीचरण उपाध्याय पर टिप्पणी की, और उसको ले कर हमने जो तहकीकात की; उससे इस पोस्ट का (हमारे हिसाब से रोचक) मसाला निकल आया है.कल अनूप सुकुल जी की पोस्ट पर वर्षा के बारे में निराशा केContinue reading “सुरियांवां, देवीचरण, टाई और नमकीन!”