नीलिमा का ड्राइवर #गांवदेहात


रामेश्वर जैसे लोग कर्जे में डूबे हैं। पगार शराब पीने और लोन चुकाने में चली जाती है और अगले महीने का राशन भी बनिया की दुकान से उधार आता है। शराब और उधार; उधार और शराब – यही नियति है रामेश्वर जैसों की।

लॉकडाउन 3.0 में #गांवदेहात का माहौल


अब बशीर बद्र की पंक्तियाँ, संशोधन कर, गांव के लिये भी लागू हो रही हैं – कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से। ये कोरोना काल का गांव है; ज़रा फ़ासले से मिला करो।

सुग्गी के मास्क #ग्रामचरित


मेहनती है सुग्गी। घर का काम करती है। खेती किसानी भी ज्यादातर वही देखती है। क्या बोना है, क्या खाद देना है, कटाई के लिये किस किस से सहायता लेनी है, खलिहान में कैसे कैसे काम सफराना है और आधा आधा कैसे बांटना है – यह सब सुग्गी तय करती है।

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