बच्चे पॉलीथीन की पन्नियां, महिलाये और पुरुष दऊरी या अन्य कोई बर्तन लिये जमीन पर गिरे पीले फूल बीनते दिखते हैं। भीनी भीनी गंध पूरे वातावरण में बसी है। मेरे तो घर में कमरों में भी, जब हवा तेज होती है तो यह गंध घुस आती है। कुछ फूल बीन लाओ तो उसके आसपास गंधContinue reading “देहात महुआ बीनने में लगा है”
Category Archives: Surroundings
धईकार बस्ती का दऊरी कारीगर
दऊरी की बुनावट देखी मैने। बहुत सुघड़ थी। बांस की सींकें जो प्रयोग की गयी थीं, उनमें कहीं कोई एसा कोना नहीं था जिससे उपयोग करने वाले की उंगलियों में फांस लग जाये। दऊरी का आकार भी पूर्णत:अर्ध गोलाकार था।
कुनबीपुर में मचान और खीरे का मोल भाव
एक मचान देख कर मैं ठहर गया। सवेरे के सूरज की रोशनी में देखने की इच्छा के कारण मेड़ पर पैर साधते हुये मचान के दूसरी ओर पंहुचा। साथ में राजन भाई थे। सवेरे की साइकलिंग में मेरे सहयात्री। महिला मचान के पास थी। नाम पूछा – अमरावती। मचान उसका नहीं था। वह सवेरे सवेरेContinue reading “कुनबीपुर में मचान और खीरे का मोल भाव”
