आज सवेरे घना कोहरा था। सवेरे घर से निकलना नहीं हो पाया। सवेरे साढ़े छ-पौने सात बजे से मुझे उत्तर मध्य रेलवे की मालगाड़ी परिचालन की स्थिति लेनी प्रारम्भ करनी होती है और यह क्रम सवेरे साढ़े नौ बजे तक चलता है। आज यह बताया गया कि पूरा जोन – गाजियाबाद से मुगलसराय और तुगलकाबादContinue reading “कुहासे में भटकन”
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इलाहाबाद और किताबों पर केन्द्रित एक मुलाकात
वे सुबोध पाण्डे हैं। किताबों में बसते हैं। पुस्तकों में रमने वाले जीव। भीषण पढ़ाकू। मैं उनसे कहता हूं कि उनकी तरह पढ़ने वाला बनना चाहता हूं, पर बन नहीं सकता मैं – किताबें खरीदने का चाव है, पर अनपढ़ी किताबें घर में गंजती जा रही हैं। इस पर सुबोध पाण्डे जी का कहना हैContinue reading “इलाहाबाद और किताबों पर केन्द्रित एक मुलाकात”
कल्लू ने मटर बोई है!
कछार में इस पार लोग सब्जियां लगाते थे। हाथ से ही गड्ढा खोदते, बीज डालते और खाद-पानी देते थे। पिछली बरस कल्लू-अरविन्द और उसके पिताजी को डीजल जेनरेटर/पम्पिंग सेट के माध्यम से गंगाजी का पानी इस्तेमाल कर सिंचाई करते देखा था। इस साल देखा कि उनके कुछ हिस्से में ट्रैक्टर से गुड़ाई कर कुछ बीजContinue reading “कल्लू ने मटर बोई है!”
