सीता से ब्याह रचइओ, हो राम, जब जइयो जनकपुर में!


आज डाला छठ मनाने के बाद स्त्रियों का एक झुण्ड लौट रहा था। आगे एक किशोर चल रहा था प्रसाद की डलई उठाये। औरतें समवेत गा रही थीं मधुर स्वरों में –  सीता से ब्याह रचइओ, हो राम, जब जइयो जनकपुर में! दीपावली के बाद आती है यह छठ। और दीपावली जहां नकली लाइटों, पटाखोंContinue reading “सीता से ब्याह रचइओ, हो राम, जब जइयो जनकपुर में!”

“तुम्हारा ब्लॉग पढ़ने का कारण”


श्रीयुत श्रीप्रकाश मेरे ब्लॉग के नियमित पाठक हैं। जब वे (सन 2009 में) हमारे सदस्य यातायात (रेलवे के यातायात सेवा के शीर्षस्थ अधिकारी) हुआ करते थे, तब से वे लोगों को मेरे ब्लॉग के बारे में बताते रहे हैं। उस समय वे सक्रिय रूप से भारतीय रेलवे यातायात सेवा की साइट पर अधिकारियों को सम्बोधितContinue reading ““तुम्हारा ब्लॉग पढ़ने का कारण””

कार्तिक अमावस की सांझ


विल्वपत्र की टेरी तोड़ रही थीं कोटेश्वर महादेव की मालिनें। एक बकरी उनसे स्पर्धा कर रही थी विल्वपत्र और गेंदे के फूल चबाने में। पर स्पर्धा इतनी विकट नहीं थी कि बकरी पर कोई डण्डा पड़ता। हटाने पर वह एक स्थान से दूसरे पर जा कर कुछ न कुछ चबाने को पा जा रही थी।Continue reading “कार्तिक अमावस की सांझ”

Design a site like this with WordPress.com
Get started