नेगोशियेशन तकनीक : धीरे बोलो, हिन्दी बोलो


मैं अपनी बताता हूं. जब मैं आवेश में होता हूं – भाषण देने या ऐसी-तैसी करने के मूड़ में होता हूं तो अंग्रेजी निकलती है मुंह से. धाराप्रवाह. और जब धीरे-धीरे बोलना होता है, शब्दों को तोल कर बोलना होता है तब हिन्दी के सटीक शब्द पॉपकॉर्न की तरह एक-एक कर फूट कर सामने आतेContinue reading “नेगोशियेशन तकनीक : धीरे बोलो, हिन्दी बोलो”

गुज्जर आन्दोलन,रुकी ट्रेनें और तेल पिराई की गन्ध


परसों रात में मेरा केन्द्रीय-कंट्रोल मुझे उठाता रहा. साहब, फलाने स्टेशन पर गुज्जरों की भीड़ तोड फोड कर रही है. साहब, फलने सैक्शन में उन्होने लेवल क्रासिंग गेट तोड दिये हैं. साहब, फलानी ग़ाड़ी अटकी हुयी है – आगे भी दंगा है और पीछे के स्टेशन पर भी तोड़ फोड़ है…. मैं हूं उत्तर प्रदेशContinue reading “गुज्जर आन्दोलन,रुकी ट्रेनें और तेल पिराई की गन्ध”

पैसे ले कर चलना खतरनाक है


मेरे पड़ोस में एक अकाउण्टेण्ट रहता है. रिलायंस की किसी फ्रेंचाइज़ी में काम करता था. एक कर्मचारी को उसने बैंक में कैश जमा करने भेजा. उसे देर होने लगी तो उसने दो-तीन बार मोबाइल पर फोन किया. हुआ यह था कि उस कर्मचारी को रास्ते में किन्ही बदमाशों ने गोली मार कर उसके पास सेContinue reading “पैसे ले कर चलना खतरनाक है”

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