धूमिल यादें वह 1959-60 का समय होगा। मेरी यादें बहुत धूमिल हैं। चार-पांच साल का बच्चा, जो स्कूल भी नहीं जा रहा था, कितना याद रख सकता होगा। पर इतना याद है कि मेरा एक छोटा भाई हुआ था, जो जन्म के चौदहवें दिन ही चल बसा। मेरी अम्मा सौरी में थीं—बंद कमरे में।Continue reading “धनुषटंकार”
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बरियापुर में मंहगू नाई
गांवदेहात डायरी बाल बढ़ गये थे। साइकिल चलाते देख नंदलाल ने दूर से ही पैलगी उछाली — पालागी गुरू जी। अब तो आपके बाल आइन्स्टीन कट लग रहे हैं। मुझे भी लगा कि तेल-फुलेल-कंघी से दूरी रखने और नाई को नियमित न बुलाने के कारण मेरी शक्ल वैसी हुई होगी, वर्ना आइन्स्टीन जैसा बौद्धिक व्यक्तित्वContinue reading “बरियापुर में मंहगू नाई “
अरुणा का बिजली स्मार्ट मीटर
गांवदेहात डायरी दलित बस्ती में अब लगभग हर घर में प्री-पेड स्मार्ट मीटर लग चुका है। नियम सीधा है—पैसा जमा करें और बिजली का उपयोग करें; पैसा खत्म तो मीटर खुद ही लाइन काट देगा। पर समस्या यह है कि कई घरों की बिजली कट चुकी है, और लोगों को समझ ही नहीं आ रहाContinue reading “अरुणा का बिजली स्मार्ट मीटर”
