गांवदेहात डायरी सवेरे साइकिल चला कर लौटा तो रामसेवक आ चुके थे। वे हमारे माली हैं और रविवार को आधा दिन हमारे बगीचे को देते हैं। मैं गेट खोलकर अंदर घुसा तो उन्होंने आगे बढ़कर गेट बंद किया। वे न भी करते तो मुझे खराब न लगता। अब यह अपेक्षा बची नहीं है किContinue reading “रविवार की सुबह”
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नेपाल के बारे में बतियाते जवान
गांवदेहात डायरी उमरहाँ के विकास पांडे के यहां से शहद की दो बोतलें लेकर लौट रहा था। गांव के फाटक पर रुकना पड़ा—रेलवे फाटक बंद था। इतने में एक मोटर साइकिल बगल में आकर रुकी। तीन सवार थे—नौजवान। कोई बात कर रहे थे नेपाल की। एक ने मुझसे पूछा—साइकिल बैटरी वाली है? बात का दरवाजाContinue reading “नेपाल के बारे में बतियाते जवान “
हरिहर से बातचीत
गांवदेहात डायरी सालों बाद कटका के प्लेटफार्म नम्बर 2 पर गया। वहीं मिला हरिहर। अंधा है वह। हाथ में एक लाठी, बगल में एक झोला—जिसमें बिस्कुट के पैकेट। उन्हीं को लेकर वह ट्रेनों के कॉरिडोर में चलता और बेचता है। हरिहर प्लेटफार्म पर बैठने लगा तो किसी ने आगाह किया—“ट्रेन आवे वाली बा। आगे बैठबेContinue reading “हरिहर से बातचीत”
